मिस्त्र के पिरामिडो की रोचक जानकारिया !

- मिस्त्रों के पिरामिडों का निर्माण तत्कालीन राजाओं के शवों
को दफनाने के लिए किया गया था। उन राजाओं के शवों को पिरामिड में दफनाते
समय खाने-पीने की चीजें, कपड़े, गहने, बर्तन और हथियार भी साथ में ही दफनाए
जाते थे। इतना ही नही कई बार तो सेवक-सेविकाओं को भी साथ में ही दफना दिया
जाता था। यह सब करने के पीछे प्राचीन मिस्त्र के लोगों का मानना था कि
मरने के बाद व्यक्ति दूसरी दुनिया में चला जाता था। जहां उन को साथ में
दफनाई गई चीजे काम आती हैं। आइए आपको इन पिरामडों के बारे में कुछ और रोचक
तथ्य बताते हैं।
वैसे तो मिस्त्र में 138 पिरामिड हैं, पर इन में से गिजा का 'ग्रेट
पिरामिड' ही प्राचीन विक्ष्व के सात अजूबों की सुची में है। बाकी के 6
अजूबें काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुके हैं पर ग्रेट पिरामिड का केवल ऊपर
का 10 मीटर का हिस्सा ही गिरा है। इस पिरामिड के पास दो और पिरामिड भी हैं
जो इससे छोटे हैं।
- गीजा का 'ग्रेट पिरमिड' 450 फुट ऊँचा है। 4300 सालों तक यह
दुनिया की सबसे ऊँची संरचना रहा, पर 19वी सदी में इसका यह रिकार्ड टुट गया।
- गीजा के 'ग्रेट पिरामिड' को बनाने के लिए लगभग 30 लाख मजदूरों ने 23 साल तक काम किया।
- गीजा के 'ग्रेट पिरामिड' में 23 लाख चुना पत्थरों का प्रयोग
किया गया। इन टुकड़ों में से हर एक का वज़न 2 से लेकर 30 टन तक का है। इस
पिरामिड का आधार 13 एकड़ जमीन में फैला हुआ है।
- गीजा के 'ग्रेट पिरामिड' को 2560 ईसा पूर्व मिस्त्र के शास्क खुफु के चोथे वंश द्वारा अपनी कब्र के तौर पर बनाया गया था।
- 'ग्रेट पिरामिड' को सिर्फ 23 साल में बनाने को लेकर कई तरह
के सवाल है। एक पिरामिड वैज्ञानिक ने गणना कर हिसाब लगाया कि यदि यह केवल
23 वर्षों में बना है तो कई हज़ार मजदूरों को साल के 365 दिनों में हर दिन
10 घंटे काम करना पड़ेगा और एक घंटे में 30 टुकड़ों को रखना होगा। लेकिन
क्या 1 घंटे में 2 से लेकर 30 टन तक के 30 टुकड़ों को रखना संभव था।
- क्या आप जानते हैं इन पिरामिडो को बनाने की तकनीक के बारे
में अब तक कुछ भी पता नही चला है। वैज्ञानिक कई सालों से इस बात को जाने
में लगे है लेकिन कोई सफलता नही मिली।
- पिरामिडों को बनाने वाले पत्थरों को आपस में इस तरह से फिट किया गया कि उनमें से किसी दो की बीच एक ब्लेड भी नही घुसाई जा सकती।
- 'ग्रेट पिरामिड' के भीतर का तापमान हमेशा 20 डिग्री सेल्सियस के बराबर रहता है, चाहे बाहर का तापमान कितना भी हो।
- 'ग्रेट पिरामिड' के केंद्र में राजा खुफु के शरीर को छोड़कर
क्या है यह अब तक पता नही चला। एक फ्रांसीसी वास्तुविद पीयरे ने दावा किया
है कि 4500 साल पहले बने इस पिरामिड के केंद्र में दो कमरे स्थित हैं। इन
कमरों में फर्चीनर लगे हुए जो राजा खुफु के शरीर को रखने के बाद लगाए गए।
- वैज्ञानिक प्रोयोगो द्वारा यह प्रमाणित हो गया है कि पिरामिड
के अंदर विलक्षण किस्म की उर्जा तरंगे लगातार काम करती रहती है जो सजीव और
निर्जाव दोनो ही प्रकार की वस्तुओं पर प्रभाव डालती हैं। वैज्ञानिक इसे
'पिरामिड पॉवर' कहते है।
- पिरामिड के अंदर बैटने से सिर दर्द एवं दांत दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
- घाव छाले, खरोच आदि पिरामिड के अंदर बैठने से बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं।
- एक प्रयोग के दौरान कुत्तों को चौकोर, गोल और पिरामिड के
आकार के घरों में रखा गया। प्रयोग के बाद यह पाया गया कि पिरामिड के आकार
के घरों में रहने वाले कुत्ते अधिक आज्ञाकारी, और समझदार निकले और उनकी
सेहत भी अच्छी हो गई।